Monday, 26 February 2018

अनजाने कर्म का फल

What is Karam? How it works?

☺: अनजाने कर्म का फल

VERY INTRESTING

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था ।
उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ।
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला ।
तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई ।
किसी को कुछ पता नहीं चला ।
फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी ।
अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ ।

ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....

बहुत दिनों तक यह मामला यमराज की फाईल में अटका (Pending) रहा ....

फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ।
उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया पर रास्ता बताने के साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि "देखो भाई ....जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।"

बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे, उसी समय यमराज ने फैसला (decision) ले लिया कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ।

यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों ??
जब कि उन मृत ब्राह्मणों की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका (role) भी नहीं थी ।
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो, जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे बड़ा आनन्द मिलता हैं । पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला .... ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ।
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनन्द मिला । इसलिये राजा के उस अनजाने पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ।

बस इसी घटना के तहत आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दूसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से (बुराई) करता हैं तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस बुराई करने वाले के खाते में भी डाल दिया जाता हैं ।

अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि हमने जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं किया, फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया .... ??

ये कष्ट और कहीं से नहीं, बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके पाप-कर्मो से आया होता हैं जो बुराई करते ही हमारे खाते में ट्रांसफर हो जाता हैं ....

☺: A very deep philosophy of Karma example ☝

Saturday, 17 February 2018

संसार-सागर से तरने का उपाय क्या है ?

*संसार-सागर से तरने का उपाय क्या है ?*

यौवन अवस्था की बहार उम्रभर थोड़े ही रहती है, यह तो फूल की सुगंध की तरह इधर आयी – उधर गयी।

जो आज जवानी के नशे में मतवाले हो रहे हैं, शरीर को इत्र व फुलेल (सुगंधित तेल) से सुगंधित करते है एवं भाँति-भाँति के गहने पहने रहते हैं, वे मन में निश्चित समझ लें कि उनका यह शरीर सदा उनके साथ न रहेगा, एक दिन यहीं-का-यहीं पड़ा रह जायेगा और मिट्टी में मिल जायेगा।

काया के नाश होने से पहले ही वृद्धावस्था युवावस्था को निगल जायेगी। जो दाँत आज मोतियों की तरह चमकते हैं वे कल हिल-हिलकर एक-एक करके आपका साथ छोड़ देंगे।

उस समय आपका मुख पोपला और भद्दा हो जायेगा। जिन बालों को आप रोज धोते और साफ रखते हैं तथा जिनकी तरह-तरह से सजावट करते हैं, वे बाल एक दिन सफेद हो जायेंगे।

ये फूले हुए गाल पिचक जायेंगे। आँखों में यह रसीलापन न रहेगा। इनमें पीलापन और धुँध छा जायेगी। यह तो आपकी काया और जवानी का हाल है।

अब धन-दौलत की चंचलता देखें।

लक्ष्मी को चंचला और चपला भी कहते हैं। लक्ष्मी ठीक उस चपला (बिजली) की तरह है जो क्षण में जाती है। यह धन किसी के पास सदा नहीं रहा। आज जो धनी है, कल वही निर्धन हो जाता है। आज जो हजारों को भोजन देता है, कल वही अपने भोजन के लिए औरों के द्वार पर भटकता फिरता है। आज जो राजा है, कल वही रंक हो जाता है। आज जो बिना मोटर-गाड़ी के घर से बाहर नहीं जाता, कल वही पैदल दौड़ा फिरता है।

सारांश यह कि धन-वैभव व तन तो सदा किसी के पास न रहा है और न आगे ही रहेगा।

शुक्रनीति सार में लिखा हैः

यौवनं जीवितं चित्तं छाया लक्ष्मीश्च स्वामिता।
चञ्चलानि षडेतानि ज्ञात्वा धर्मरतो भवेत्।।

"यौवन, जीवन, मन, शरीर का सौंदर्य, धन और स्वामित्व – ये छहों चंचल हैं यानी स्थिर होकर नहीं रहते।

यह जानकर धर्म में रत हो जाना चाहिए।"

जिस तरह आयु, यौवन और धन चंचल हैं, उसी तरह नारी भी चंचल है। आज जो रमणियों के साथ विचरण करते हैं, कल वे ही उनके वियोग में तड़पते देखे जाते हैं।

अतः धन यौवन का गर्व न करें, काल इनको पलक झपकते हर लेता है और पछतावा ही हाथ लगता है।

तो इस भयंकर संसार-सागर से तरने का उपाय क्या है ?

इस संदर्भ में पूज्य बापू जी की आत्मानुभवी अमृतवाणी में आता हैः

"जन्म-मरण के दुःखों से सदा के लिए छूटने का एकमात्र उपाय यही है कि अविद्या को आत्मविद्या से हटाने वाले सत्पुरुषों के अनुभव को अपना अनुभव बनाने के लिए लग जाना चाहिए।

जैसे भूख को भोजन से तथा प्यास को पानी से मिटाया जाता है, ऐसे ही अज्ञान को, अँधेरी अविद्या को आत्मज्ञान के प्रकाश से मिटाया जाता है।

ब्रह्मविद्या के द्वारा अविद्या को हटाने मात्र से आप ईश्वर में लीन हो जाओगे।

अगर अविद्या हटाकर उस परब्रह्म-परमात्मा में दो क्षण के लिए भी बैठोगे, तो बड़ी-से-बड़ी आपदा टल जायेगी।"

(स्रोतः ऋषि प्रसाद, जून 2017, पृष्ठ संख्या 25,26 अंक 294)

Wednesday, 7 February 2018

सब वेदों का सार है राधा

सब वेदों का सार है राधा -

आज कान्हा जी की मुस्कान रोके नहीं रुक रही अकेले ही महल की छत पर बैठे हुए कृष्ण दूर आकाश में चाँद को.निहारते जा रहे हैं.और मंद मंद मुस्कुराते जा रहे हैं !

कान्हा जी बार बार पीछे मुड़ के देख भी लेते हैं की कोई उन्हें देख तो नहीं रहा और फिर अनायास ही , अपने ख्यालों में.खोकर मुस्कुराने लगते है !

और उसी समय अर्जुन वहां पर आ गये अपने सखा कृष्ण को.अकेले में मुस्कुराता देखकर अर्जुन ने उनके आनंद में विघ्न डालना उचित ना.समझा और चुपचाप एकांत में खड़े होकर.भगवान् के दर्शन करने लगे !

अर्जुन सोचने लगे आखिर भगवान् को इस चाँद में.ऐसा.क्या नज़र आ रहा है.जो ये इतना मुस्कुरा रहे हैं और फिर अर्जुन ने गौर से चाँद को ओर देखा तो आश्चर्यचकित रह गए !

चाँद में अर्जुन को साक्षात श्री राधारानी के दर्शन होने लगे श्रीराधे भी यमुना के किनारे बैठी यमुना की श्याम वर्ण लहरों में अपने सांवरे के दर्शन कर रही थी !

और मुस्कुराती भी जाती थीं और कान्हा जी से बातें भी करती जाती थी !

“देख रहे हो कान्हा जी ! आपके सखा अर्जुन चुप चाप
हमारी बातें सुन रहे हैं ” श्रीराधे यमुना की लहरों में
अपना हाथ लहराते हुई बोली !

“अर्जुन से तो कुछ छुपा नहीं है राधे ! वो तो बस मेरे आनंद में विघ्न उत्पन्न करना नहीं चाहता ”कान्हा जी गोरे चाँद की तरफ निहारते हुए बोले !

“अगर ऐसा है आपको अर्जुन इतने ही प्रिय हैं तो आपने गीता का ज्ञान देते समय अर्जुन से एक बात छुपा के क्यूँ रक्खी ?” राधे इठलाती हुई बोलीं !
.
“वो इसलिए राधे की उस बात को सुनने के बाद अर्जुन को वहीँ समाधि लग जाती और वो युद्ध आदि कुछ भी नहीं कर पाता !” कृष्ण जी महल की छत के एक किनारे से दूसरे किनारे को जाते हुए बोले !

“ठीक है कान्हा जी अब हम कल बात करेंगे। अर्जुन आपके निकट आ रहे हैं !” श्रीराधे ने ऐसा कहते हुए अपना आँचल यमुना के शांत जल में लहराया  जिस से जल में विक्षोभ उत्पन्न हुआ और वहां से कान्हा जी की छवि अदृश्य हो गयी !

उधर कान्हा जी ने चाँद के सामने हाथ फेरकर उसे बादलों से ढँक दिया और राधे की छवि वहां से अदृश्य हो गयी !

अर्जुन हिम्मत करके कृष्ण के सम्मुख आये और हाथ जोड़कर बोले - “क्षमा करें प्रभु ! लेकिन ऐसी कौन सी बात है जो आपने गीता के ज्ञान में से मुझे नहीं बताई ?”

कृष्णा मुस्कुराते हुए बोले - “याद है अर्जुन ? मैंने तुमसे कहा था की मै फिर तुमसे उस ज्ञान को कहूँगा जिसको जान लेने के बाद और कुछ जानना शेष नहीं रह जाता और जिसे जान लेने के बाद मानव का वेदों से उतना ही प्रयोजन रह जाता है जितना सागर मिलने के बाद छोटे तालाब से और इतना कहकर मै चुप रह गया था !”

“हाँ प्रभु मुझे याद है आप वेदों का सार बताते बताते चुप रह गए थे !” अर्जुन ने विस्मित होकर कहा !

श्रीकृष्ण ने आकाश की और देखा चाँद पूरी तरह छिप चुका था और फिर अर्जुन के कंधे पर हाथ रखकर बोले - “राधानाम ही सब वेदों का सार है अर्जुन ! श्रीराधे की कृपा से ये जान लेने के बाद और कुछ जानना शेष नहीं रह जाता बस राधे ही एक मात्र जानने योग्य हैं !

राधा नाम जपने मात्र से ही मनुष्य सब वेदों का पार पा लेता है !” और इस प्रकार गीता के पूर्ण ज्ञान को पाकर अर्जुन समाधि के योग्य हुए !!

श्रीराधे ! सब वेदों का सार !!

       ।।जपे जा राधे राधे ।।

Tuesday, 12 December 2017

What is the size of GOD


Credit for this goes to some unknown writer. This is as received on whatsapp.

What's​ the size of God ?  
Excellent reading !

A boy asked the father :
_What’s the size of God?_

Then the father looked up to the sky and seeing an airplane asked the son :

What’s the size of that airplane ?

The boy answered: It’s very small . I can barely see it . So the father took him to the airport and as they approached an airplane he asked :

And now , what is the size of this one ?

The boy answered : Wow daddy , this is huge !

Then the father told him : God is like this ! His size depends on the distance between you and  Him .

*The closer you are to Him , the greater He will be in your life !*

🙏🏻

Sunday, 16 July 2017

Superb lessons

*World's 8 superb lessons worth sharing with loved ones:*
--------------<>-------------

*Shakespeare :*👌🏿

Never  play  with the feelings

of  others  because  you may

win the  game but the  risk is

that  you  will surely  lose

the person  for a  life time.

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*Napoleon:*👌🏿

The world  suffers  a  lot. Not

because  of  the  violence  of

bad people, But because   of

the silence of good people!

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*Einstein :*👌🏿

I  am  thankful  to  all those

who  said  NO  to  me   It's

because  of  them  I  did  it

myself.

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*Abraham Lincoln :*👌🏿

If friendship is your weakest

point  then  you  are  the

strongest  person  in the

world.

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*Shakespeare :*👌🏿

Laughing  faces  do  not

mean that  there is  absence

of sorrow!  But it means that

they  have the ability to deal

with it.

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*William  Arthur :* 👌🏿

Opportunities   are  like

sunrises, if  you  wait too

long  you  can miss them.

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*Hitler :* 👌🏿

When  you  are  in  the light,

Everything follows  you, But

when  you  enter  into   the

dark, Even your own shadow

doesn't  follow  you.

--------------------------------

*Shakespeare :* 👌🏿

Coin  always  makes  sound

but  the  currency  notes are

always  silent.  So  when

  your value  increases

keep quiet.

Hope you gained something from this.

_Copied__

Tuesday, 11 July 2017

Rent for ant

Once again as received on whatsapp

🐜An ant knocked on the door of a house.

The house owner opened the door.

"I want a place to stay," said the ant.

"I have a vacant room which you can occupy for free of cost," said the owner.

The ant went inside and occupied the vacant room.

After some days, the ant brought in another ant 🐜and requested the
owner, "Can you please allow this ant to stay with me?"

"Oh sure, you can do so without paying any rent," said the owner.

After some days the ant brought a 3rd 🐜ant and requested the owner
to allow it to stay with them.

The owner agreed to it without asking for any rent.

This went on as the 🐜ant brought in more and more ants and the owner agreed to let them stay without any rent.

One fine day, the ant brought in the  10th ant 🐜and requested the owner
to allow it to stay with them all.

The owner said,
"OK, you can all stay here but now you all need to pay rent."

Now the question is:

Why did the owner ask for rent when the 10th ant came in?

🤔
.
🤔
.

🤔
.
.

.

🤔

.
🤔
.
.
.
.
.
.🤔

Because they were now tenants!
🐜🐜🐜🐜🐜🐜🐜🐜🐜🐜
😂😂😂😂😂😂😂😂😂

Friday, 26 May 2017

I must help my wife

As circulated on whatsapp

Must Read

I DO NOT HELP MY WIFE!!

A friend came to my house for coffee. We sat and talked, talking about life. At some point in the conversation, i said, "I'm going to wash the dishes and I'll be right back."
He looked at me as if I had told him I was going to build a space rocket. Then he said to me with admiration but a little perplexed: "I'm glad you help your wife, I do not help because when I do my wife does not praise. Last week I washed the floor and no thanks."
I went back to sit with him and explained that I did not "help" my wife. Actually, my wife does not need help, she needs a partner. I am a partner at home and the society has divided functions, but it is not a "help" as they put it.
I do not help my wife clean the house because I live here too and I need to clean it too.
I do not help my wife to cook because I also want to eat and I need to cook too.
I do not help my wife wash the dishes after eating because I also use those dishes.
I do not help my wife with her children because they are also my children and my job is to be a father.
I do not help my wife to wash, spread or fold clothes, because the clothes are also mine and my children.
I am not a help at home, I am part of the house. And as for praising, I asked my friend when was the last time after his wife finished cleaning the house, washing clothes, changing bed sheets, bathing in her children, cooking, organizing, etc did you praise her and said thank you
But a thank you of the type: Wow, sweetheart !!! You are fantastic!!!
Does that sound absurd to you? When you, once in a lifetime, cleaned the floor, you expected her to praise why? You never thought about that, my friend?
Maybe because for you, the macho culture has shown that everything is her job.
Perhaps you have been taught that all this must be done without having to move a finger? Then praise her as you wanted to be praised, in the same way, with the same intensity. Give her a hand, behave like a true companion, not as a guest who only comes to eat, sleep, bathe and satisfy needs ... Feel at home. Its your house.
The real change in our society should begins from our homes, let us teach our sons and daughters the real meaning of responsibility.