Wednesday, 2 March 2016

lovely 3rd march on whatsapp

[7:40AM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: 🌳
मृत्यु के बाद भी पुण्य कमाने के 7 (सात) आसान उपाय ।

.🔜 (1)= किसी को धार्मिक ग्रन्थ भैंट करे जब भी कोई उसका पाठ करेगा आप को पुण्य मिलेगा ।

🔜(2)= एक व्हीलचेयर किसी अस्पताल मे दान करे जब भी कोई मरीज उसका उपयोग करेगा पुण्य आपको मिलेगा।

श🔜(3)= किसी अन्नक्षेत्र के लिये मासिक ब्याज वाली एफ. डी बनवादे जब भी उसकी ब्याज से कोई भोजन करेगा आपको पुण्य मिलेगा

🔜 (4)=किसी पब्लिक प्लेस पर वाटर कूलर लगवाएँ हमेशा पुण्य मिलेगा।

🔜(5)= किसी अनाथ को शिक्षित करो वह और उसकी पीढ़ियाँ भी आपको दुआ देगी तो आपको पुण्य मिलेगा।
याद रहे औलाद तो अपना हक समझती है जरा भी कमी रह जाय तो मरणोपराँत भी गाली देती है कि हमारे लिये किया ही क्या।

🔜(6)= अपनी औलाद को परोपकारी बना सके तो सदैव पुण्य मिलता रहेगा।

🔜( 7)= सबसे आसान है कि आप ये बाते औरों को बताये किसी एक ने भी अमल किया तो आपको पुण्य मिलेगा..... , जन्नत में आप के नाम के पुण्य के 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 लगते रहेगे और आपको 🍎 मिलते रहेंगे इसलिये रुकिये नही निरंतर लगे रहिये....................................................
[8:48AM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: तुम्हें आता तो है हूनर मेरी खामोशी पढ़ने का
यह अलग बात है कि जवाब से किनारा करते हो ।।
[8:48AM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: शहर में हर शख्स ने वसीयत में शराफत पायी है..मैं हैरान हूँ सोचकर कि ये बेईमानी कहाँ से आई है..🤔
[8:48AM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: ना हम रहे दिल लगाने के क़ाबिल,
ना दिल रहा गम उठाने के क़ाबिल,
लगा उसकी यादों से जो ज़ख़्म दिल पर,
ना छोड़ा उस ने मुस्कुराने के क़ाबिल.
[8:48AM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: शायरी करना भी तो एक नेकी का काम है,,,,
कितने बिछड़े हुए लफ़्जो को मिला देता हूँ...!!
[12:08PM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: Today's Joke

पत्नी: आप बहुत भोले हैं... आपको कोई भी बेवकूफ बना देता है


पति: शुरुआत तो तेरे बाप ने की थी .😜😜😜
[2:08PM, 02/03/2016] ‪+91 99885 00848‬: पति : कहाँ गयी थी??

पत्नी : रक्तदान करने…

पति : पीती थी तब तक तो ठीक था, अब बेचने भी लगी..!
😜😝😁😂
[8:29AM, 03/03/2016] +918528913108: अयोध्या से वापस आने पर मां कौशल्या ने पूछा...
"रावण" को मार दिया ?

 भगवन श्रीराम ने सुन्दर जवाब दिया...

महाज्ञानी, महाप्रतापी, महाबलशाली, प्रखंड पंडित, महा शिवभक्त, चारो वेदो के ज्ञाता, शिव ताण्डवस्त्रोत के रचयिता लंकेश को मैंने नहीं मारा,

उसे "मै" ने मारा है।
[8:54AM, 03/03/2016] +918528913108: कमबल और रजाई को
                  अब कर दो माफ,
कूलर और ए.सी.को
                 अब कर लो साफ,
पसीना छूटेगा अब
                     दिन और रात,
दोनों वक्त नहाने से ही अब
                     बनेगी बात,
अपनी Nature में भी
                     रखना नरमी,
मेरी तरफ से आप सभी को
              'Happy Garmi'
          🙉🙈🙊😜😜
[8:54AM, 03/03/2016] +918528913108: रण बीच चौकड़ी भर-भर कर
चेतक बन गया निराला था
राणाप्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा का पाला था

जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था

गिरता न कभी चेतक तन पर
राणाप्रताप का कोड़ा था
वह दौड़ रहा अरिमस्तक[1] पर
वह आसमान का घोड़ा था

था यहीं रहा अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा था यहाँ नहीं
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरिमस्तक पर कहाँ नहीं

निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौडा करबालों में
फँस गया शत्रु की चालों में

बढ़ते नद-सा वह लहर गया
फिर गया गया फिर ठहर गया
विकराल वज्रमय बादल-सा
अरि[2] की सेना पर घहर गया

भाला गिर गया गिरा निसंग
हय[3] टापों से खन गया अंग
बैरी समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग
[8:54AM, 03/03/2016] +918528913108: हठ कर बैठा चाँद एक दिन माता से यह बोला

सिलवा दो माँ मुझे उन का मोटा एक झिंगोला
सन सन करती हवा रात भर जड़े में मरता हूँ
ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ
आसमान का सफ़र और यह मौसम है जाड़े का
न हो अगर तो ला दो मुझको कुर्ता ही भाड़े का
बच्चे की सुन बात कहा माता ने अरे सलोने
कुशल करे भगवान लगे मत तुझको जादू टोने
जाड़े की तो बात ठीक है पर मैं तो डरती हूँ
एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ
कभी एक अंगुल भर चौड़ा कभी एक फुट मोटा
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा
घटता बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है
अब तू यही बता नाप तेरा किस रोज लिवायें?
सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आए
[8:54AM, 03/03/2016] +918528913108: एकबूँद
ज्यों निकल कर बादलों की गोद से।
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी।।
सोचने फिर फिर यही जी में लगी।
आह क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।।
दैव मेरे भाग्य में क्या है बढ़ा।
में बचूँगी या मिलूँगी धूल में।।
या जलूँगी गिर अंगारे पर किसी।
चू पडूँगी या कमल के फूल में।।
बह गयी उस काल एक ऐसी हवा।
वह समुन्दर ओर आई अनमनी।।
एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला।
वह उसी में जा पड़ी मोती बनी।।
लोग यों ही है झिझकते, सोचते।
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर।।
किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें।
बूँद लौं कुछ और ही देता है कर।।
[8:54AM, 03/03/2016] +918528913108: उठो लाल अब आँखे खोलो
पानी लाई हूँ मुँह धो लो

बीती रात कमल दल फूले
उनके ऊपर भंवरे डोले

चिड़िया चहक उठी पेड़ पर
बहने लगी हवा अति सुंदर

नभ में न्यारी लाली छाई
धरती ने प्यारी छवि पाई

भोर हुआ सूरज उग आया
जल में पड़ी सुनहरी छाया

ऐसा सुंदर समय न खोओ
मेरे प्यारे अब मत सोओ
[8:54AM, 03/03/2016] +918528913108: काली-काली कू-कू करती,
जो है डाली-डाली फिरती!
       कुछ अपनी हीं धुन में ऐंठी
       छिपी हरे पत्तों में बैठी
जो पंचम सुर में गाती है
वह हीं कोयल कहलाती है.
        जब जाड़ा कम हो जाता है
        सूरज थोड़ा गरमाता है
तब होता है समा निराला
जी को बहुत लुभाने वाला
         हरे पेड़ सब हो जाते हैं
         नये नये पत्ते पाते हैं
कितने हीं फल औ फलियों से
नई नई कोपल कलियों से
         भली भांति वे लद जाते हैं
         बड़े मनोहर दिखलाते हैं
रंग रंग के प्यारे प्यारे
फूल फूल जाते हैं सारे
         बसी हवा बहने लगती है
         दिशा सब महकने लगती है
तब यह मतवाली होकर
कूक कूक डाली डाली पर
         अजब समा दिखला देती है
         सबका मन अपना लेती है
लडके जब अपना मुँह खोलो
तुम भी मीठी बोली बोलो
          इससे कितने सुख पाओगे
          सबके प्यारे बन जाओगे.

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